ओशो की प्रमुख 5 किताबें

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ओशो की प्रमुख 5 किताबें

1. संभोग से समाधि की ओर : यह ओशो की सबसे चर्चित और विवादित किताब है, जिसमें ओशो ने काम ऊर्जा का विश्लेषण कर उसे अध्यात्म की यात्रा में सहयोगी बताया है। साथ ही यह किताब काम और उससे संबंधित सभी मान्यताओं और धारणाओं को एक सकारात्मक दृष्टिकोण देती है। ओशो कहते हैं ‘काम पाप नहीं। यह भगवान तक पहुंचने का पहला पायदान है।’
2. ध्यान योग, प्रथम और अंतिम मुक्ति : यह ओशो द्वारा ध्यान पर दिए गए गहन प्रवचनों का संकलन है। इसमें ध्यान की अनेक विधियों का वर्णन है, जो हमारी सहायता कर सकती हैं। इस किताब को ध्यान के लिए मार्गदर्शक की तरह इस्तेमाल करने के लिए आपको इसे पहले से आखिरी पेज तक पढ़ना जरूरी है। कोई विधि आजमाने के लिए इस किताब का इस्तेमाल अंत:प्रेरणा से करें।
3. मैं मृत्यु सिखाता हूं : इस किताब के माध्यम से ओशो समझाते हैं कि जन्म और मृत्यु एक ही सिक्के को दो पहलू हैं। जन्म और मृत्यु को मिलाकर ही पूरा जीवन बनता है। जो अपने जीवन को सही और पूरे ढंग से नहीं जी पाते, वही मृत्यु से घबराते हैं। सच तो यह है ओशो जीवन को पूरे आनंद के साथ जीने की कला सिखाते हैं और यही कला मृत्यु के भय से हमें बचाती और जगाती है।
4. प्रेम-पंथ ऐसो कठिन : ओशो की यह किताब प्रेम के तीन रूपों – प्रेम में गिरना, प्रेम में होना और प्रेम ही हो जाना, को स्पष्ट करती है। ओशो एक प्रश्नोत्तर प्रवचनमाला शुरू करते हैं और प्रेम व जीवन से जुड़े सवालों की गहरी थाह में हमें गोता लगवाने लिए चलते हैं। यह एक इंद्रधनुषी यात्रा है – विरह की, पीड़ा की, आनंद की, अभीप्सा की और तृप्ति की।
5. कृष्ण स्मृति : यह किताब ओशो द्वारा कृष्ण के बहु-आयामी व्यक्तित्व पर दी गई 21 वार्ताओं और नवसंन्यास पर दिए गए एक विशेष प्रवचन का खास संकलन है। यही वह प्रवचनमाला है, जिसके दौरान ओशो के साक्षित्व में संन्यास ने नए शिखर को छूने के लिए उत्प्रेरणा ली और ‘नव-संन्यास अंतरराष्ट्रीय’ की संन्यास दीक्षा का सूत्रपात हुआ।
ओशो पर प्रमुख 5 किताबें
1. दस हजार बुद्धों के लिए एक सौ गाथाएं : यह किताब मां धर्म ज्योति ने लिखी है, जिसमें ओशो से मिलने के बाद के उनके अपने संस्मरण हैं। ये संस्मरण न केवल पाठक को ओशो के और नजदीक लाते हैं, बल्कि जीवन में समर्पण का भाव भी जगाते हैं।
2. ध्यान और उत्सव के ओजस्वी ऋषि : ‘स्वामी सत्य वेदांत’ द्वारा लिखी गई यह किताब ओशो के ओजस्वी जीवन के अहम पहलुओं को दर्शाती है। साथ ही ओशो कम्यून और ऑरेगन से संबंधित व उसके बाद की घटनाओं से जुड़े सच को भी उजागर करती है।
3. बियॉन्ड ओशो : जॉर्ज ब्लास्चके की यह किताब विदेशों में बेस्टसेलर रह चुकी है। इसमें लेखक ने ओशो के काम और उनकी कार्यदृष्टि की बड़े ही सुंदर ढंग से व्याख्या की है। साथ ही किताब ओशो के विचारों और उनके संदेशों को तलाशने में भी मदद करती है।
4. कौन है ओशो? : यह किताब न केवल जन्म से लेकर मृत्यु तक ओशो के जीवन को बारीकी से दर्शाती है, बल्कि उनके ऊपर लगे आरोपों और विवादों को भी स्पष्ट करती है। साथ ही ओशो का इस जगत को दिया योगदान व उनके दर्शन-देशनाओं को भी रेखांकित करती है।
5. परम विद्रोही ओशो : डॉ. कुलदीप कुमार धीमान की यह किताब ओशो के क्रांतिकारी विचारों का विश्लेषण करती है। साथ ही यह भी पता चलता है कि ओशो दूसरे तथाकथित संतों-गुरुओं से कितने और कैसे भिन्न हैं।
शशिकांत ‘सदैव’

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