बच्चे के लिए स्वयं को बदलें : ओशो

via https://youtu.be/-9ljLFXSRZw
बच्चे के लिए स्वयं को बदलें : ओशो

बच्चे पर दबाव न डालें। कभी भी जबरदस्ती न करें। भूलकर भी हिंसा न करें, बहुत प्रेम से, अपने जीवन के परिवर्तन से, बहुत शांति से, बहुत सरलता से बच्चे को सुझाएं। आदेश न दें, यह न कहें कि ऐसा करो। क्योंकि जब भी कोई ऐसा कहता है, ऐसा करो! तभी भीतर यह ध्वनि पैदा होती है, सुनने वाले में कि नहीं करेंगे। यह बिल्कुल सहज है। उससे यह मत कहना कि ऐसा करो। उससे यही कहना कि मैंने ऐसा किया और आनंद पाया, अगर तुम्हें आनंद पाना हो तो इस दिशा में सोचना। उसे समझाना, उसे सुझाव देना, आदेश नहीं, उपदेश नहीं। उपदेश और आदेश बड़े खतरनाक सिद्ध होते हैं। उपदेश और आदेश बड़े अपमानजनक सिद्ध होते हैं।

छोटे बच्चे का बहुत आदर करना, क्योंकि जिसका हम आदर करते हैं उसको ही केवल हम अपने हृदय के निकट ला पाते हैं। यह हैरानी की बात मालूम पड़ेगी। हम तो चाहते हैं कि छोटे बच्चे बड़ों का आदर करें। हम उनका कैसे आदर करें! लेकिन अगर हम चाहते हैं कि छोटे बच्चे आदर करें मां-बाप का, तो आदर देना पड़ेगा। यह असंभव है कि मां-बाप अनादर दें और बच्चों से आदर पा लें, यह असंभव है।

बच्चों को आदर देना जरूरी है और बहुत आदर देना जरूरी है। उगते हुए अंकुर हैं, उगता हुआ सूरज हैं। हम तो व्यर्थ हो गए, हम तो चुक गए। अभी उसमें जीवन का विकास होने को है। यह परमात्मा ने एक नए व्यक्तित्व को भेजा है, वह उबर रहा है। उसके प्रति बहुत सम्मान, बहुत आदर जरूरी है। आदरपूर्वक, प्रेमपूर्वक, खुद के व्यक्तित्व के परिवर्तन के द्वारा उस बच्चे के जीवन को भी परिवर्तित किया जा सकता है।

अंतर्मुखी कोई तभी बन सकता है, जब भीतर आनंद की ध्लनि गूंजने लगे। हमारा चित्त वहीं चला जाता है, जहां आनंद होता है। अभी मैं यहां बोल रहा हूं, अगर कोई वहां एक वीणा बजाने लगे और गीत गाने लगे, तो फिर आपको अपने मन को वहां ले जाना थोड़ा ही पड़ेगा, वह चला जाएगा। आप अचानक पाएंगे कि आपका मन मुझे नहीं सुन रहा है, वह वीणा सुनने लगा। मन तो वहां जाता है, जहां सुख है, जहां संगीत है, जहां रस है।

बच्चे बहिर्मुखी इसलिए हो जाते हैं कि वे मां-बाप को देखते हैं, दौड़ते हुए बाहर की तरफ। एक मां को वे देखते हैं बहुत अच्छे कपड़ों की तरफ दौड़ते हुए, देखते हैं, गहनों की तरफ दौड़ते हुए, देखते हैं बड़े मकान की तरफ दौड़ते हुए, देखते हैं बाहर की तरफ दौड़ते हुए। उन बच्चों का भी जीवन बहिर्मुखी हो जाता है।

अगर वे देखें एक मां को आंख बंद किए हुए और उसके चेहरे पर आनंद झरते हुए देखें और वे देखें एक मां को प्रेम से भरे हुए और वे देखें एक मां को छोटे मकान में भी प्रपुल्लित और आनंदित, और वे कभी-कभी देखें कि मां आंख बंद कर लेती है और किसी आनंद लोक में चली जाती है। वे पूछेंगे कि यह क्या है? खेहां चली जाती हो? वे अगर मां को ध्यान में और प्रार्थना में देखें, वे अगर किसी गहरी तल्लीनता में उसे डूबा हुआ देखें, वे अगर उसे बहुत गहरे प्रेम में देखें, तो वे जानना चाहेंगे कि कहां जाती हो? यह खुशी कहां से आती है? यह आंखों में शांति कहां से आती है? यह प्रपुल्लता चेहरे पर कहां से आती है? क्षह सौंदर्य, यह जीवन कहां से आ रहा है?

.Hello Welcome to Nello News

we are sharing Inspirational & Motivational Videos which Help You For Your Success.

All images are only for educational purpose and we do not own the images and also most of them are cc creative licensed Images

So Hope You Guys Like My Videos Share And Subscribe.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *