क्यों हर मुसलमान के लिए जरूरी है जकात?

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क्यों हर मुसलमान के लिए जरूरी है जकात?

1. भारत में धर्म
हिंदुत्व की प्रधानता वाले भारत में अधिकांशत: सनातन धर्म और वैदिक परंपरा की ही बातें की जाती हैं। शायद यही वजह है कि सामान्य जनमानस सनातन परंपरा को तो समझने लगता है लेकिन अन्य मुख्य धर्मों को लेकर उसके मस्तिष्क में बहुत भ्रांतियां विकसित हो जाती हैं।
2.भ्रांतियां
इस्लाम भी एक ऐसा ही प्रमुख धर्म है जिसके अनुयायी दुनिया के कोने-कोने तक फैले हैं, लेकिन फिर भी इस धर्म से जुड़ी कुछ ऐसी भ्रांतियां हैं जिसकी वजह से इस्लाम धर्म के अनुयायियों को कट्टरपंथी कहा जाता है।
3.
इस्लाम की रूपरेखा
बहुत ही कम लोग इस बात से अवगत हैं कि इस्लाम धर्म के पांच ऐसे स्तंभ हैं जिनके आधार पर इस धर्म की रूपरेखा तैयार हुई, जो आगे चलकर सामाजिक हित में साबित हुई। आइए जानते हैं क्या हैं इस्लाम के वो पांच पाक स्तंभ।
4.ईमान
कुरान में लिखा है “जो व्यक्ति अल्लाह पर विश्वास रखता है, अल्लाह उसे हर परेशानी से निकालकर सारी सुविधाएं उपलब्ध करवाता है”। ईमान का अर्थ है ‘अल्लाह’ पर विश्वास करना, यही वजह है कि इस्लाम धर्म में केवल अल्लाह पर विश्वास करने का ही प्रावधान है।
5.
अल्लाह की शरण
हर मुसलमान को अल्लाह के सहारे ही अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए। जो लोग ऐसा करते हैं अल्लाह उनकी सभी परेशानियां लेकर उन्हें दुनियावी दुखों और बुराइयों से मुक्त करता है। ईमान के अनुसार जब व्यक्ति को यह पता होता है कि उसका साथ देने के लिए अल्लाह हमेशा साथ है तो वह कभी कोई गलत निर्णय नहीं लेता।
6.
नमाज
इस्लाम धर्म में दिन में पांच वक्त की नमाज जरूरी बताई गई है और प्रत्येक वक्त की नमाज पढ़ने का तरीका भी बताया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये पांच तरीके योगासनों से मिलते-जुलते हैं जो करीब 14 शताब्दी से भी पुराने हैं। प्रत्येक आसन शरीर में मौजूद सातों चक्रों को सक्रिय करने से जुड़ा है। प्रत्येक नमाज पढ़ने से पहले स्नान को भी आवश्यक बताया गया है ताकि गंदगी को दूर रखा जाए।
7.तकबीर औइर अल कैय्याम
नमाज पढ़ने के पांच तरीकों में शामिल हैं तकबीर और अल कैय्याम, जो एक साथ मिलकर योग में शामिल पर्वत आसन बनाते हैं। यह आसन शारीरिक मुद्रा को सुधारने, उसमें संतुलन रखने के साथ-साथ रक्तचाप को भी नियंत्रित रखता है। दमा और दिल के मरीजों के लिए ये आसन फायदेमंद है।
8.रुकु
ये तीसरे वक्त की नमाज पढ़ने का तरीका है जो योग के ही एक आसन की तरह है। यह जांघों के साथ-साथ शरीर के निचले हिस्से, मांसपेशियों में खिंचाव लाने का काम करता है। साथ ही साथ शरीर के हर भाग तक रक्त के प्रवाह को तेज करता है। इसके अलावा यह पेट, जांघ की मांसपेशियों को टोन भी करता है।
9.सुजूद और जुलस
मस्तिष्क को कार्य करने के लिए रक्त के प्रवाह की आवश्यकता होती है जो सुजूद की सहायता से पूरी होती है। वहीं जुलस, शरीर में पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। यह पांव, जांघों की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है।
10.जकात
कुरान में लिखा है कि प्रत्येक मुसलमान को अपनी सालाना आय का 2.5% भाग दान करना चाहिए, जिसे जकात कहा जाता है। हर मुसलमान के लिए सालाना जकात निकालना आवश्यक है। जकात की वजह से आर्थिक अंतर को कम करने का प्रयास किया जाता है। जकात पारदर्शिता और बचत को बढ़ावा देती है।
11.रोजा
सालाना रमजान के महीने में प्रत्येक मुसलमान को दिन निकलने से चांद दिखने तक व्रत रखने को आवश्यक कहा गया है, इसे रोजा कहा जाता है। इस पूरे महीने किसी भी प्रकार के निंदनीय कर्मों, भौतिक सुख, शारीरिक संबंधों आदि से दूरी रखने को कहा गया है।
12.
वैज्ञानिक लाभ
यह तो कुरान में लिखा है लेकिन आप जानते हैं रोजा रखने के तमाम शारीरिक फायदे भी हैं। इससे मस्तिष्क को कार्य करने के लिए बल मिलता है, शरीर में कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है। रमजान का उपवास व्यक्ति को उन लोगों के प्रति सहानुभूति रखना सिखाता है, जिन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध नहीं होता।
13.हज
वे मुसलमान जो शारीरिक और वित्तीय, दोनों ही प्रकार से सक्षम हैं, उनके लिए कुरान में जीवन में एक बार मक्का जाकर हज करने को आवश्यक बताया गया है।
14.समाज हित
उपरोक्त बिंदुओं और इस्लाम के जरूरी पांच स्तंभों को जानकर ये बात तो स्पष्ट है कि इस्लाम धर्म को जितना कंफ्यूज्ड और कट्टर धर्म माना गया है, इसके उलट वह समाज के हित के लिए कार्य करने वाला बेहद उदार धर्म है।

भारत में धर्म

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